सिस्टम पस्त, माफिया मस्त! शाम ढलते ही सड़कों पर दौड़ रहे बिना रवन्ने के 'यमदूत', सफेदपोशों की शह या विभाग की 'सांठगांठ'? गांव की गलियों में दौड़ रहे ओवरलोड 'यमदूत', राजस्व को लाखों का चूना
पिरान कलियर: सिस्टम पस्त, माफिया मस्त! शाम ढलते ही सड़कों पर दौड़ रहे बिना रवन्ने के 'यमदूत', सफेदपोशों की शह या विभाग की 'सांठगांठ'? गांव की गलियों में दौड़ रहे ओवरलोड 'यमदूत', राजस्व को लाखों का चूना
पिरान कलियर (हरिद्वार): पिरान कलियर क्षेत्र में अवैध खनन का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा बिछाया गया 'कार्रवाई का जाल' महज एक कागजी खानापूर्ति साबित हो रहा है। आलम यह है कि सूरज ढलते ही गांव की शांत गलियां अवैध और ओवरलोड खनन से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की गड़गड़ाहट से थर्रा उठती हैं। बिना रवन्ने (Gate Pass) के दौड़ रहे ये वाहन न केवल सरकार के राजस्व को चपत लगा रहे हैं, बल्कि मासूम जिंदगियों के लिए भी बड़ा खतरा बने हुए हैं।
हादसों से भी नहीं लिया सबक, आखिर किसका है संरक्षण?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन ओवरलोड वाहनों के कारण पहले भी कई भीषण हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बावजूद इसके, प्रशासन की नींद नहीं टूट रही है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके इशारे पर ये 'यमदूत' रिहायशी इलाकों और गलियों को अपना सुरक्षित कॉरिडोर बना चुके हैं?
ग्रामीणों का सीधा आरोप: "सांठगांठ का खेल"
क्षेत्र के लोगों ने विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब अधिकारियों की मिलीभगत और 'सेटिंग' के बिना संभव नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार:
सूचना पर भी चुप्पी: कई बार विभाग को अवैध परिवहन की सटीक जानकारी दी गई, लेकिन अधिकारी मौके पर पहुंचने या कार्रवाई करने में हमेशा कतराते हैं।
राजस्व की लूट: बिना रवन्ने के वाहन चलाकर सरकार को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है।
मिलीभगत का प्रमाण: मुख्य सड़कों के बजाय गांव की गलियों का इस्तेमाल करना और उस पर विभाग का मौन रहना, मिलीभगत की ओर साफ इशारा करता है।
सिस्टम फेल: गलियों में 'आतंक' का राज
शाम ढलते ही माफिया सक्रिय हो जाते हैं और गलियों से ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को निकाला जाता है। इससे न केवल सड़कें टूट रही हैं, बल्कि रात के समय पैदल चलने वाले ग्रामीणों और बच्चों की जान पर हर वक्त तलवार लटकी रहती है।
जनता की हुंकार: "अगर जल्द ही इन अवैध वाहनों पर लगाम नहीं कसी गई और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।"
बड़ा सवाल: क्या हरिद्वार प्रशासन और शासन के उच्च अधिकारी पिरान कलियर के इस 'खूनी खेल' और राजस्व की लूट पर संज्ञान लेंगे, या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?